Sunday, 2 December 2012

कर्म

            मोहनदास करमचन्द गाँधी इस नाम और इससे जुड़े शक्शियत के परिचय  की आप को जरुरत नहीं है, पर मै आज इस  शक्शियत की तुलना भगवान राम से करना चहता हूँ। ये वो नाम है जिनकी हम पूजा करते हैं। तो आइए देखें की कैसे इस साधारण से इन्सान ने  अपने कर्मो से भगवान राम से भी बड़ा आदर्श हमारे लिए स्थापित किया है।
         
           भगवान् राम का जन्म एक राजघराने मे  हुआ फिर राम ने जन कल्याण क लिए सब कुछ छोड़ कर वन चले गए और जन कल्याण के काम मे लग गए। युद्ध किया, रावण का वध किया, बीच मे समुंद्र बाधा बना तो उसे भी सुखाने के लिए धनुष उठा लिया बिना ये सोचे की उस समुंद्र मे रहने वाले जीवो का क्या होगा।
          
          अब  जरा महात्मा गाँधी के जीवन पर नजर डालते है , गाँधीजी का भी जन्म एक सम्पन्न परिवार में हुआ। पेशे  से वकील थे, वकालत ठीक ठाक चलती थी पर वो भी जन कल्याण के लिए सब कुछ छोड़ छाड कर संघर्ष मे लग गए और बिना हिंसा किये देश को आजादी दीलाई।

          अब साथी और सहयोगियों की बात करे तो राम और गाँधी दोनों बिना सहयोगियों के शायद ये युद्ध नहीं जीत पाते। 

         अब बात विजय के बाद की तो विजय के उपरांत राम गद्दी श्वीकार कर राजा बन गए पर  गाँधी जी ने आजादी के बाद भी कोई गद्दी नहीं ली।

 तो देखा दोस्तों एक इंसान भी अपने कर्मो से भगवान् से बड़ा आदर्श हमारे लिए स्तापित कर सकता है।
  
वी. द्र. - वैसे मै गाँधी जी का पूर्ण अनुयाई नहीं हूँ इस लिए मेरे एक गाल पर चाटा मार के टेस्ट करने की कोशिश मत करना :)
मैं इस लेख के जरिये सिर्फ ये बताने की कोशिश कर रहा था की अगर इंसान अपने कर्मो को सुधार ले तो वो भी औरों के लिए आदर्श स्थापित कर सकता है।

सो दोस्तों आज से ही आप समाज के कल्याण मे लग जाये, ये ही भगवान् की सब से बड़ी पूजा है। आज से ही ये अपने जीवन का एक नियम बना लें 
"भगवान् की पूजा करो मन से और जरुरतमंदो की सेवा करो तन मन धन से। "