Wednesday, 28 November 2012

उम्मीद (EXPECTION)


             दोस्तों कहा तो ये जाता है कि उम्मीद पर दुनिया टिकी है,पर मेरा मानना तो ये है की इस दुनिया मे दु:खों का सबसे बड़ा कारण उम्मीद ही है। अब आप सोच रहे होंगे कैसे? तो दोस्तों आइये अब आप को इस सत्य से अवगत कराता हूँ। 
             
             चलिए बचपन से शुरू करते हैं, तो जरा अब अपने दु:खों को याद करें और उस के पीछे के कारण पर गौर फरमाए। जब आप अपने किसी बड़े (मम्मी , पापा, भाई बहन,) से खिलोनों या पॉकेट मनी की उम्मीद करते थे और वो आप की उम्मीद की मुताबिक नहीं होती थी तो दुःख होता था पर अचानक अगर कोई महेमान आ गया और उसने आप को कुछ गिफ्ट दे दिया तो खु:शियों का ठिकाना नहीं होता था।
             अगर एग्जाम या टेस्ट मे दोस्त से कोई प्रश्न इस उमीद से पूछते थे की शायद उस को आता होगा और वो नहीं बता पता था तो दुःख होता था पर अगर अचानक से उस प्रश्न का उत्तर कही और से पता चल जाता था तो खु:शी मिलती थी।
             बड़े हुए नौकरी करने लगे अच्छे BOSS की उमीद की मिला तो अच्छा लगेगा पर  अगर नहीं मिला तो दुःख होगा, तो बेहतर तो यही होगा की बिना किसी उमीद के जाये और तब अगर अच्छा ऑफिस और वर्कप्लेस मिल जाये तो कितनी खुशी होगी।
           दोस्तों अगर आप भी अपने जीवन के अतीत मे नज़र डालेंगे तो पायेंगे की जब भी आप को किसी बात से  दुःख या परेशानी हुई होगी तो उस के पीछे का कारण भी उस चीज को ले के आपकी की गई उम्मीद ही होगी। 
            वैसे देने को तो बहुत उदाहरण हैं, जैसे अच्छा प्रमोशन, अच्छी पोस्टिंग, अच्छा जीवनसाथी इत्यादि-इत्यादि पर मेरे लिखने का मकसद तो इतना ही है की मैं आप लोगों का ध्यान  इस तरफ खीचसकूँ की लोग उम्मीद कर के  न सिर्फ दु:खो को अपने जीवन मे बुलावा देते हैं बल्कि अपने जीवन मे आने वाली खु:शियों को भी कम कर देते है क्योंकी आप तो उन खु:शियों की उमीद पहले ही कर चुके होते हैं, और मुझे ये बताने की जरुरत नहीं है की जीवन मे अचानक आई खु:शी, पहले से उम्मीद की हुई  खु:शी से कही ज्यादा खु:शी  देती है।

तो आइये आज ही से उम्मीदों को गोली मार, जीवन मे आने वाली SURPRISES  को एक्सेप्ट करने के लिए तैयार  रहते हैं क्योंकी  जिंदगी का असली मजा भी SURPRISES मे ही है।

Saturday, 17 November 2012

BE LIKE BAMBOO

       टॉपिक देख के तो यही लग रहा होगा दोस्तों जैसे कोई मनोरंजक कहानी है, लेकिन सच्चाई तो यही है की सचमुच अगर इंसान अपनी जिंदगी को बाँस  के पेड़ की तरह जिए तो उसकी जिंदगी दूसरो क लिए उदाहरण बन जायगी ।
आइये अब जरा इस बात को और गहराई से देखते हैं , और बाँस के गुणों को समझते हैं.........।
बाँस कहने को तो एक घाँस है पर वो सबसे उंची घाँस कही जाती है, तो अगर इन्सान भी अपने काम को इतने मन से करे की उस क्षेत्र मे वो सबसे आगे निकल जाए तो कौन नहीं पहचाने गा उसे।
कभी सुना है कि किसी भी आंधी या तूफान मे कोई बाँस  का पेड़ उखड़ा या टुटा हो? 
      नहीं...!!!
      जानते है क्यों?
      उसकी लचक के कारण। तो अगर इन्सान भी अपने आप को इतना लचीला (flexible ) बना ले की कोई परेशानी उसे तोड़ न सके तो उसका सफल होना तो निश्चित ही है ।

      दूसरो का आप पर भरोसा - इस गुण मे भी बाँस बहुत आगे है।  कितनी भी ऊंची ईमारत बनानी हो, लोगों को बाँस के  टिकाऊ पन और मजबूती पर  इतना भरोसा है की सब उसी का सहारा लेते है (for making ladders), हमारे पुर्वज तो बाँस पर इतना भरोसा करते थे की घाँस के तिनको को भी उस के सहारे बांध कर अपना आशियाना बना लेते थे ,जिस को हम लोग झोपड़ी  बोलते है।


     समाज की जरुरत (your importance in society ) - तो दोस्तों, लोग आप को तभी महत्व देगे जब आप अपने आप को उनकी जरुरत बना लोगे, तो आईये अब देखते है की किस तरह बाँस हमारे जिंदगी के हर मोड़ पर  काम आता है: जब बच्चा जन्म लेता है तो बाँस के बने पालने मे झूलता है जब थोडा बड़ा होता है तो उसी से बने खिलोनों से खेलता है, थोडा और बड़ा होता है और बदमाशिया करता है तो माँ बाप और शिक्षक उस का इस्तमाल  उसे सुधारने के लिए करते है, थोडा और बड़ा होने पर बाँसुरी बजा के कुछ खास लोगों को इम्प्रेस करने की भी कोशिश करता है और जब उस मे सफल हो जाता है तो उसी के बने मंडप मे बैठ कर जिंदगी भर अपने साथी का साथ देने के लिए बंधन मे  भी बंध जाता है, और अंत समय पे जब वो इस दुनिया को छोड़ के जाता  है तो भी अपनी अंतिम यात्रा उसी से बनी सवारी (टिकठी) पर  तय करता है।


तो दोस्तों बाँस के इतने गुणों को देख कर अब आप भी बोल सकते हैं कि BE LIKE BAMBOO..  :)