आइये अब जरा इस बात को और गहराई से देखते हैं , और बाँस के गुणों को समझते हैं.........।
बाँस कहने को तो एक घाँस है पर वो सबसे उंची घाँस कही जाती है, तो अगर इन्सान भी अपने काम को इतने मन से करे की उस क्षेत्र मे वो सबसे आगे निकल जाए तो कौन नहीं पहचाने गा उसे।
कभी सुना है कि किसी भी आंधी या तूफान मे कोई बाँस का पेड़ उखड़ा या टुटा हो?
नहीं...!!!
जानते है क्यों?
उसकी लचक के कारण। तो अगर इन्सान भी अपने आप को इतना लचीला (flexible ) बना ले की कोई परेशानी उसे तोड़ न सके तो उसका सफल होना तो निश्चित ही है ।
दूसरो का आप पर भरोसा - इस गुण मे भी बाँस बहुत आगे है। कितनी भी ऊंची ईमारत बनानी हो, लोगों को बाँस के टिकाऊ पन और मजबूती पर इतना भरोसा है की सब उसी का सहारा लेते है (for making ladders), हमारे पुर्वज तो बाँस पर इतना भरोसा करते थे की घाँस के तिनको को भी उस के सहारे बांध कर अपना आशियाना बना लेते थे ,जिस को हम लोग झोपड़ी बोलते है।
समाज की जरुरत (your importance in society ) - तो दोस्तों, लोग आप को तभी महत्व देगे जब आप अपने आप को उनकी जरुरत बना लोगे, तो आईये अब देखते है की किस तरह बाँस हमारे जिंदगी के हर मोड़ पर काम आता है: जब बच्चा जन्म लेता है तो बाँस के बने पालने मे झूलता है जब थोडा बड़ा होता है तो उसी से बने खिलोनों से खेलता है, थोडा और बड़ा होता है और बदमाशिया करता है तो माँ बाप और शिक्षक उस का इस्तमाल उसे सुधारने के लिए करते है, थोडा और बड़ा होने पर बाँसुरी बजा के कुछ खास लोगों को इम्प्रेस करने की भी कोशिश करता है और जब उस मे सफल हो जाता है तो उसी के बने मंडप मे बैठ कर जिंदगी भर अपने साथी का साथ देने के लिए बंधन मे भी बंध जाता है, और अंत समय पे जब वो इस दुनिया को छोड़ के जाता है तो भी अपनी अंतिम यात्रा उसी से बनी सवारी (टिकठी) पर तय करता है।
तो दोस्तों बाँस के इतने गुणों को देख कर अब आप भी बोल सकते हैं कि BE LIKE BAMBOO.. :)

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